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हिन्दू सनातन धर्म में मरने के बाद व्यक्ति को भूतात्मा कहा जाता है। आत्मा मूलत: जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति उक्त तीन अवस्था में ही रहती है। चौरासी लाख योनियों में से गुजरने के बाद आत्मा को मानव देह मिलती है। Soul, after death, Bhutatma, jivatma, ...
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    गरुड़ पुराण के बारे में सभी जानते होंगे। गरुड़ पुराण में स्वर्ग, नरक, पाप, पुण्य के अलावा भी बहुत कुछ है। उसमें ज्ञान, विज्ञान, नीति, नियम और धर्म की बाते हैं। गरुड़ पुराण में एक ओर जहां मौत का रहस्य है जो दूसरी ओर जीवन का रहस्य भी छिपा हुआ है।

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    पहली बात तो यह कि आत्महत्या शब्द ही गलत है, लेकिन यह अब प्रचलन में है। आत्मा की किसी भी रीति से हत्या नहीं की जा सकती। हत्या होती है शरीर की। इसे स्वघात या देहहत्या कह सकते हैं। दूसरों की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है लेकिन खुद की ही देह की हत्या करना ...

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    मन और चित्त में अंतर है। चित्त में एक लाख जन्मों की स्मृतियां संग्रहित रहती है। चित्त कभी न नष्ट होने वाली हार्ड डिस्क की तरह होता है। वर्तमान जन्म से पहले का जन्म सबसे ज्यादा स्पष्ट होता है, क्योंकि उस जन्म में मरकर ही हम इस जन्म में आए हैं। ताजा ...

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    वेद, स्मृति और पुराणों अनुसार आत्मा की गति और उसके किसी लोक में पहुंचना का वर्णन अलग-अलग मिलता है। हम हां पौराणिक मत को जानेंगे लेकिन पहले संक्षिप्त में वैदिक मत भी जान लें जो कि गति के संदर्भ में है।

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    धर्मशास्त्रों के अनुसार पितरों का निवास चंद्रमा के उर्ध्वभाग में माना गया है। ये आत्माएं मृत्यु के बाद 1 से लेकर 100 वर्ष तक मृत्यु और पुनर्जन्म की मध्य की स्थिति में रहती हैं। पितृलोक के श्रेष्ठ पितरों को न्यायदात्री समिति का सदस्य माना जाता है।